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महिलावाद का ख़ौफ़नाक सच

  आप लोग शायद दिल्ली से सटे गाजियाबाद का निशा शर्मा को भूल गए होंगे निशा शर्मा को मीडिया ने रातों-रात पूरे भारत में हीरो बना दिया था जिसने दहेज लोभी पति को दरवाजे से वापस लौटा दिया था हर चैनल पर मेहंदी लगाकर चुनरी ओढ़ कर निशा शर्मा इंटरव्यू देती थी उसके दरवाजे पर मीडिया के सैकड़ ों ओ बी वैन खड़े रहते थे इस केस में जिस लड़के से निशा शर्मा की शादी तय हुई थी उसके और उसके पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद हो गई लड़के की जॉब छूट गयी.. 1 साल जेल में रहा फिर 8 साल वह कोर्ट कचहरी के धक्के खाता रहा ..लड़के की मां सरकारी नौकरी में थी वह भी जेल जाने से सस्पेंड हो गई और लड़के के पिता हर्ट अटैक आने से निधन पा गए दरअसल निशा शर्मा ने अपने बॉयफ्रेंड से शादी करने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा था कोर्ट ने भी अपने आदेश में यही कहा कि निशा शर्मा ने जानबूझकर यह नोटंकी किया था लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि वह मजबूर है कि वह निशा शर्मा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते और उन्होंने उस लड़के के पूरे परिवार को बाइज्जत बरी कर दिया लेकिन सोचिए दिल्ली से गाजियाबाद जाकर 8 साल तक मुकदमा लड़ना अपने पिता का ...

कोरोना महामारी

 #Covid_19 साजिश और खेल को समझिए... तारीख 22 अगस्त 2020, राज्य - मध्यप्रदेश, स्थान- ग्वालियर का फूलबाग मैदान। यहाँ क्या हुआ- भाजपा ने एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कितने लोग शामिल हुए - लगभग 4 हज़ार लोग। Social Distancing का पालन हुआ - नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ। क्या सभी ने मास्क लगाया था- नहीं सभी ने मास्क नहीं लगाया था। केंद्र में किसकी सरकार है - भाजपा की मध्यप्रदेश में किसकी सरकार है- भाजपा की केंद्र का गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय का क्या आदेश है - Social Diatancing का पालन कीजिए और मास्क लगाइए। मध्य प्रदेश के गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय का क्या आदेश है - Social Diatancing का पालन कीजिए और मास्क लगाइए।   सरकार Covid-19 के बारे में क्या कहती है - सरकार कहती है कि यह संक्रामक रोग है इससे बचें। इस कारण सरकार लॉक डाउन लगा दी है, स्कूल बंद कर दिया गया, पूजा - पाठ बंद कर दिया गया है। गणेश चतुर्थी के बड़े आयोजन रोक दिए गए हैं। बहुत कुछ ठप कर दिया गया है। लेकिन राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे हैं ? क्यों भाई ? यही खेल समझना है। अच्छा ठीक है, तब आपका क्या कहना है - मे...

कोरोना -एक वैश्विक षडयंत्र

मैंने देखा न्यूज़ कि भारत मे कोरोना की वैक्सीन की खुराक मात्र 225 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी इसको लेकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और गावी में एक करार हुआ है। अब मजे की बात ये है कि ये दो फाउंडेशन एक ही आदमी चलाता है बिल गेट्स। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन गावी को 15 करोड़ डॉलर की मदद देगा वैक्सीन निर्माण में मतलब इनका पैसा घूम फिरकर इनके ही पास। इनलोगो का दावा है कि शुरुआती परीक्षण सफल भी रहा है अंतिम परीक्षण अगस्त महीने के अंत मे हो जाएगा। इनका स्टेटमेंट पढ़ा जाए तो उसमे ये मिलेगा की दुनिया के गरीब देशों को नजर में रखते हुए ये कीमत तय की गई है ताकि आम जनता को आसानी से मुहैया कराई जा सके और ज्यादा से ज्यादा से लोगो को टपकाया जा सके और अपने मंसूबों को अंजाम दिया जा सके। इनके एजेंडा में भारत का स्थान पहले है जहां 10 करोड़ वैक्सीन की खुराक अगस्त के अंत तक देनी है। भाई तुम तुम्हारी वैक्सीन पहले वहां दो जहां से वायरस निकला पहली जरूरत उनको है।  तुम अमेरिका, ब्राजील, रूस, इजरायल इन सब देशों का नाम क्यों नही लेते। इनको पता है पश्चिमी देशों में विरोध प्र...

मैं मनुष्य हूँ..नहीं - नहीं .... मेरा नाम *आदमखोर* 

मैं मनुष्य हूँ.. अरे नहीं - नहीं यह नाम तो मैंने बस संसार की आंखों में धूल झोंकने हेतु रखा हुआ है वास्तव में तो मेरा नाम *आदमखोर* है। मैं अपने इस नाम के अनुकूल ही व्यवहार करता हूँ। मैंने संसार में श्रेष्ठतम प्राणी व अमृत तुल्य दूध देने वाली *गाय* व सबका मल खाने वाले *सुअर* किसी को नहीं छोड़ा। कभी मैं बकरा खाता हूं, कभी भैंसा खाता हूं, कभी ऊंट खाता हूं, कभी मछली खाता हूं, यहां तक कि मैंने कुत्ते/गधे/घोड़े किसी को नहीं छोड़ा मैं सबको अपना आहार बना चुका हूँ। मैंने छिपकली को भून के खा लिया, सांप को कच्चा चबा लिया, चींटियों की चटनी बना के खायी तो 10-10 केकड़ों को उठाके मुंह में चबा लिया। मेढ़क को फ्राई करके खा लिया तो मछली को तड़पते हुए उसमें मसाला भर दिल धड़कते हुए काट - काट के खा लिया। पर मैं यहां भी नहीं रुक रहा, मेरी जीभ का स्वाद बढ़ता जा रहा है अब कुछ - कुछ देशों में मैंने *मानव भ्रूण* भी खाना आरम्भ कर दिया है आख़िरकार विकास भी तो होना चाहिए, विकास ही तो सफलता व सभ्य समाज का पैमाना है अतः मैं अपनी जीभ लपलपाते निरन्तर आगे बढ़ रहा हूँ और मुझे बस उस दिन की प्रतीक्षा है जब मैं पूर्ण सभ्य हो जाऊंगा औ...

और कितना गिरेगा इंसान

और कितना गिरेगा ये #इंसान ------- केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। उसे अनन्नास ऑफर किया जाता है। वह मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं। मुँह में हुए ज़ख्मों की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी। गर्भ के दौरान भूख अधिक लगती है। उसे अपने बच्चे का भी ख़याल रखना था। घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते हैं लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी उन्होंने दुःख और बेचैनी में इसके ...

कोरोना बीमारी या खौफ़ क़ा व्यापार

 हर 10 साल ,15 साल में नया वायरस निकालकर उसके वैक्सीन बेचने का व्यापार कोई नया नही है।इस बार चीन ने दुनिया जे व्यापार जगत पर कब्जा करने के लिए और अपनी मांगे बड़े देशों से मनवाने के किये ऐसा वायरस छोड़ा है।चीन के पास इसकी दवा पहले से तैयार थी।हॉस्पिटल बनाने की तैयारी पहले से करके रखी थी।आप डारे नही हमारे पास कोरोना वायरस के लक्षणों की सैकड़ों दवाईयां है। वैसे भी खासी,बुखार सर्दी कोई बीमारी नही है।हम अभी ठंड से गर्मी के मौसम में जा रहे है।इसलिए मौसम के परिवर्तन में हर साल लाखों बच्चों को और बुजुर्गों को सर्दी,खासी,बुखार होता ही है।किसी भी वायरस की कोई दवा नही होती क्योंकि वो शरीर मे जाकर अपना स्वभाव बदलता रहता है।जिसकी जैसी प्रकृति हो वैसा आकार बनाता है।इसलिए गुढी पाडवा को हम कड़वे निम को चबाते है,ताकि हम मौसम परिवर्तन के इस समय मे वायरल इंफेक्शन से बच सके क्योकि ये सबसे अच्छा एंटीबायोटिक है।अभी आम का मौसम है हम पना बनाकर पीते है।जो हमारा भारतीय पेय है। ये विटामिन-c का स्त्रोत है।इस पने में गुड़ डाला जाता है जो फोस्फोरस और आयरन का स्त्रोत है।ये उपाय हमारे त्योहारों के साथ पहले ही जोड़े ज...
एक निर्दोष जिसे फ़ांसी पर टांगा गया..... धनजंय चटर्जी.... धनंजय चटर्जी मरते दम तक ,फ़ांसी के फंदे तक यही बोलता रहा कि "मैं निर्दोष हु"" जल्लाद ने इनसे कहा कि "मैं आपको फ़ांसी दे रहा हु इसके लिए मुझे माफ़ करे" फ़ांसी देने के बाद जल्लाद बेहोश हो गया था...जल्लाद को तुरंत एम्बुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया।।ये अब तक की पहली घटना थी जब जल्लाद बेहोश हुआ हो...क्योंकि धनंजय बेकसूर था।  धनजंय की मौत के बाद कई सामाजिक संगठनो ने फांसी और मीडिया ट्रायल पर सवाल उठाए....एक फ़िल्म बनाई जिसका नाम है "Right to live" इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह धनजंय को फंसाया गया। ये फ़िल्म बांग्ला भाषा मे यु ट्यूब में उपलब्ध है। धनंजय एक गरीब परिबार से ताल्लुक रखता था और एक स्कूल का चौकीदार था।। एक स्कूल में पढ़ने वाली बच्ची के रेप एवम मर्डर केस में इन्हें फ़ांसी हुई थी। बच्ची का मर्डर और रेप जरूर हुआ था मगर उसमे कही से भी धनंजय चटर्जी का हाथ नही था। उसे स्कूल मालिक और पुलिस ने मिलकर ऐसा बलि का बकरा बनाया जिसकी कल्पना नही कर सकते। मीडिया हाउस खरीद लिए गए...पुलिस और पब्लिक प...