कोरोना बीमारी या खौफ़ क़ा व्यापार

 हर 10 साल ,15 साल में नया वायरस निकालकर उसके वैक्सीन बेचने का व्यापार कोई नया नही है।इस बार चीन ने दुनिया जे व्यापार जगत पर कब्जा करने के लिए और अपनी मांगे बड़े देशों से मनवाने के किये ऐसा वायरस छोड़ा है।चीन के पास इसकी दवा पहले से तैयार थी।हॉस्पिटल बनाने की तैयारी पहले से करके रखी थी।आप डारे नही हमारे पास कोरोना वायरस के लक्षणों की सैकड़ों दवाईयां है। वैसे भी खासी,बुखार सर्दी कोई बीमारी नही है।हम अभी ठंड से गर्मी के मौसम में जा रहे है।इसलिए मौसम के परिवर्तन में हर साल लाखों बच्चों को और बुजुर्गों को सर्दी,खासी,बुखार होता ही है।किसी भी वायरस की कोई दवा नही होती क्योंकि वो शरीर मे जाकर अपना स्वभाव बदलता रहता है।जिसकी जैसी प्रकृति हो वैसा आकार बनाता है।इसलिए गुढी पाडवा को हम कड़वे निम को चबाते है,ताकि हम मौसम परिवर्तन के इस समय मे वायरल इंफेक्शन से बच सके क्योकि ये सबसे अच्छा एंटीबायोटिक है।अभी आम का मौसम है हम पना बनाकर पीते है।जो हमारा भारतीय पेय है। ये विटामिन-c का स्त्रोत है।इस पने में गुड़ डाला जाता है जो फोस्फोरस और आयरन का स्त्रोत है।ये उपाय हमारे त्योहारों के साथ पहले ही जोड़े जा जूक है क्योंकि हम हमारी संस्कृति भूल गए है।इसलिए हम बीमारियों से ग्रस्त हो गए है।हमारी संस्कृति की ओर लौटना होगा ।भारत की ओर लौटना होगा।भारतियता की ओर लौटना ही होगा।शायद इसी दिन में लिए राजीवभाई हम सबको अपना डॉक्टर खुद बनाने की कोशिश कर रहे थे।जय हो राजीवभाई।

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