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Showing posts from June, 2020

मैं मनुष्य हूँ..नहीं - नहीं .... मेरा नाम *आदमखोर* 

मैं मनुष्य हूँ.. अरे नहीं - नहीं यह नाम तो मैंने बस संसार की आंखों में धूल झोंकने हेतु रखा हुआ है वास्तव में तो मेरा नाम *आदमखोर* है। मैं अपने इस नाम के अनुकूल ही व्यवहार करता हूँ। मैंने संसार में श्रेष्ठतम प्राणी व अमृत तुल्य दूध देने वाली *गाय* व सबका मल खाने वाले *सुअर* किसी को नहीं छोड़ा। कभी मैं बकरा खाता हूं, कभी भैंसा खाता हूं, कभी ऊंट खाता हूं, कभी मछली खाता हूं, यहां तक कि मैंने कुत्ते/गधे/घोड़े किसी को नहीं छोड़ा मैं सबको अपना आहार बना चुका हूँ। मैंने छिपकली को भून के खा लिया, सांप को कच्चा चबा लिया, चींटियों की चटनी बना के खायी तो 10-10 केकड़ों को उठाके मुंह में चबा लिया। मेढ़क को फ्राई करके खा लिया तो मछली को तड़पते हुए उसमें मसाला भर दिल धड़कते हुए काट - काट के खा लिया। पर मैं यहां भी नहीं रुक रहा, मेरी जीभ का स्वाद बढ़ता जा रहा है अब कुछ - कुछ देशों में मैंने *मानव भ्रूण* भी खाना आरम्भ कर दिया है आख़िरकार विकास भी तो होना चाहिए, विकास ही तो सफलता व सभ्य समाज का पैमाना है अतः मैं अपनी जीभ लपलपाते निरन्तर आगे बढ़ रहा हूँ और मुझे बस उस दिन की प्रतीक्षा है जब मैं पूर्ण सभ्य हो जाऊंगा औ...

और कितना गिरेगा इंसान

और कितना गिरेगा ये #इंसान ------- केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। उसे अनन्नास ऑफर किया जाता है। वह मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं। मुँह में हुए ज़ख्मों की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी। गर्भ के दौरान भूख अधिक लगती है। उसे अपने बच्चे का भी ख़याल रखना था। घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते हैं लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी उन्होंने दुःख और बेचैनी में इसके ...