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Showing posts from March, 2020

कोरोना बीमारी या खौफ़ क़ा व्यापार

 हर 10 साल ,15 साल में नया वायरस निकालकर उसके वैक्सीन बेचने का व्यापार कोई नया नही है।इस बार चीन ने दुनिया जे व्यापार जगत पर कब्जा करने के लिए और अपनी मांगे बड़े देशों से मनवाने के किये ऐसा वायरस छोड़ा है।चीन के पास इसकी दवा पहले से तैयार थी।हॉस्पिटल बनाने की तैयारी पहले से करके रखी थी।आप डारे नही हमारे पास कोरोना वायरस के लक्षणों की सैकड़ों दवाईयां है। वैसे भी खासी,बुखार सर्दी कोई बीमारी नही है।हम अभी ठंड से गर्मी के मौसम में जा रहे है।इसलिए मौसम के परिवर्तन में हर साल लाखों बच्चों को और बुजुर्गों को सर्दी,खासी,बुखार होता ही है।किसी भी वायरस की कोई दवा नही होती क्योंकि वो शरीर मे जाकर अपना स्वभाव बदलता रहता है।जिसकी जैसी प्रकृति हो वैसा आकार बनाता है।इसलिए गुढी पाडवा को हम कड़वे निम को चबाते है,ताकि हम मौसम परिवर्तन के इस समय मे वायरल इंफेक्शन से बच सके क्योकि ये सबसे अच्छा एंटीबायोटिक है।अभी आम का मौसम है हम पना बनाकर पीते है।जो हमारा भारतीय पेय है। ये विटामिन-c का स्त्रोत है।इस पने में गुड़ डाला जाता है जो फोस्फोरस और आयरन का स्त्रोत है।ये उपाय हमारे त्योहारों के साथ पहले ही जोड़े ज...
एक निर्दोष जिसे फ़ांसी पर टांगा गया..... धनजंय चटर्जी.... धनंजय चटर्जी मरते दम तक ,फ़ांसी के फंदे तक यही बोलता रहा कि "मैं निर्दोष हु"" जल्लाद ने इनसे कहा कि "मैं आपको फ़ांसी दे रहा हु इसके लिए मुझे माफ़ करे" फ़ांसी देने के बाद जल्लाद बेहोश हो गया था...जल्लाद को तुरंत एम्बुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया।।ये अब तक की पहली घटना थी जब जल्लाद बेहोश हुआ हो...क्योंकि धनंजय बेकसूर था।  धनजंय की मौत के बाद कई सामाजिक संगठनो ने फांसी और मीडिया ट्रायल पर सवाल उठाए....एक फ़िल्म बनाई जिसका नाम है "Right to live" इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि किस तरह धनजंय को फंसाया गया। ये फ़िल्म बांग्ला भाषा मे यु ट्यूब में उपलब्ध है। धनंजय एक गरीब परिबार से ताल्लुक रखता था और एक स्कूल का चौकीदार था।। एक स्कूल में पढ़ने वाली बच्ची के रेप एवम मर्डर केस में इन्हें फ़ांसी हुई थी। बच्ची का मर्डर और रेप जरूर हुआ था मगर उसमे कही से भी धनंजय चटर्जी का हाथ नही था। उसे स्कूल मालिक और पुलिस ने मिलकर ऐसा बलि का बकरा बनाया जिसकी कल्पना नही कर सकते। मीडिया हाउस खरीद लिए गए...पुलिस और पब्लिक प...